• Want a Loan....? Give a miss call on:- +91-9711669090

Blog List

जीएसटी (GST) को बनायें फ़ायदे का सौदा 

  18.August.2017

कल यूँ ही ऑफिस के कॉरिडोर से गुज़रते हुए तीन लोगों को जीएसटी (GST) के बारे में बात करते हुए सुना. उनमे से दो छोटे व्यापारी थे जिनका अपना जनरल स्टोर व गाड़ियों की पार्ट्स का व्यापार था व तीसरा हमारे ऑफिस का क्रेडिट मेनेजर था, जो पूरी लगन के साथ उन दोनों को जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने तथा प्रेस्टलोन्स से लोन लेने के फ़ायदे समझा रहा था. अधिक जानने पर पता चला कि उन्हें प्रेस्टलोन्स से लोन लेने के फायदे तो समझ आ रहे थे लेकिन हाल ही में सरकार द्वारा लागू किये गए ‘गुड्स एंड सर्विस टैक्स’ (GST) को लेकर उनके मन में कई सवाल व उलझनें थी जिन्हें हमारा क्रेडिट मैनजेर सुलझाने में लगा हुआ था. 

जीएसटी (GST) यानि ‘गुड्स एंड सर्विस टैक्स’, जिसे भारत सरकार द्वारा एक बहुत बड़े कर सुधार के रूप में 1 जुलाई 2017 से लागू किया जा चुका है. यह एक ऐसा एकीकृत टैक्स है जो वस्तुओं और सेवाओं दोनों पर लगता है. अर्थात अब एक्साइज ड्यूटी, सेवा कर, वैट, मनोरंजन कर आदि की जगह पर सिर्फ एक टैक्स हैं, वस्तु एवं सेवा कर (GST). इसको लेकर लोगों में जितनी दिलचस्पी है उतनी ही भ्रांतियां भी है. ख़ासकर व्यापारी वर्ग के मन में इसको लेकर कई तरह के सवाल जन्म ले रहें हैं, जैसे, जीएसटी का क्या मतलब है? इसका व्यापार पर क्या असर होगा? या फ़िर अभी तक चले आ रहे बाकी टैक्सेज से यह कितना अलग है? उनके मन में चल रहे इन्हीं सवालों की वजह से जीएसटी के प्रति व्यापारियों में रोष व्याप्त हो गया है और वह इसके खिलाफ़ विरोध पर उतर आये है.

बात करें पहले लगाये जाने वाले बाकि टैक्सेज जैसे- एक्साइज ड्यूटी, सेवा कर, वैट आदि की तो इसके बारे में भी व्यापरियों को गहरी जानकारी नहीं थी, चूंकि यह टैक्स लम्बे समय से चले रहे थे इसीलिए कहीं न कहीं इसको उन्होंने अपनी आदत में शामिल कर लिया था. यही वजह है की जीएसटी को वह स्वीकार नहीं कर पा रहें हैं, जिसके परिणाम स्वरुप नुकसान उन्हीं को उठाना पड़ रहा, इससे अच्छा यही है की सरकार द्वारा लागू किये इस टैक्स को वह सहर्षता के साथ स्वीकार करें व इसको समझने की सकारात्मक कोशिश करें. 

यहाँ समझने वाली बात यह है कि सरकार ने व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए और नए सिस्टम को अच्छे से समझने के लिए सभी व्यापारियों को पहले 2 महीने में जीएसटी रिटर्न फाइल करने से छूट दे रखी है. इसके अलावा किसी भी व्यापार को शुरू करने से पहले जहाँ व्यापारी को एक्साइज ड्यूटी, सेवा कर, वैट आदि अलग-अलग रजिस्ट्रेशन कराने पड़ते थे वही सरकार ने इससे राहत प्रदान करते हुए अब सिर्फ एक रजिस्ट्रेशन ही अनिवार्य किया है और वो है जीएसटी. साथ ही सरकार ने जीएसटी से सम्बंधित किसी भी समस्या के समाधान के लिए जगह-जगह जीएसटी सेवा केंद्र खोल रखे हैं. व्यापारी इनके कॉल सेंटर में फ़ोन करके या ख़ुद केन्द्रों पर जाकर अपने सवालों का जवाब प्राप्त कर सकते हैं. 

व्यापारी वर्ग के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि जीएसटी के तहत सरकार ने कारोबारियों की कुछ श्रेणियां बनायीं है जिनके अंतर्गत ऐसे छोटे व्यापारियों को शामिल किया गया है, जिनका सालाना टर्न ओवर या तो 20 लाख तक है या फिर 20 से 75 लाख तक है. जहां तक 20 लाख से नीचे के दुकानदारों की बात है तो बता दें कि उनके ऊपर जीएसटी टैक्स का कोईफर्क नहीं पड़ा है,पहले भी वो टैक्स नहींदेते थे और अब भी वह जीएसटी की छूट वाली श्रेणी में ही आते है. ऐसे में 20 लाख तक सालाना टर्नओवरवाले कारोबारियों पर जीएसटी का कोई असर नहीं पड़ा है.

वहीँ 20 से 75 लाख तक सालाना टर्नओवर वाले व्यापारियों को पहले सामान बेचने पर वैट और कई दूसरे टैक्स देने पड़ते थे, अब जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ये ग्राहकों से जीएसटी चार्ज कर पाएंगे और इनपुट क्रेडिट भी ले पाएंगे या सरकार की कंपोजिट स्कीम लेकर उन्हें सालानाटर्नओवर का सिर्फ 0.5 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा, यानि 75 लाख के टर्नओवर पर सालाना 37500 रूपए टैक्स देना होगा. एक तरीके से देखें तो कोई ख़ास बदलाव नहीं हुआ है. जहाँ तक बात रही रिटर्न फ़ाइल करने की या फिर टैक्स भरने की तो पहले से ही यह काम व्यापारियों के चार्टेड अकाउंटेंट या फिर कंसलटेंट करते आ रहे थे जो कि अभी भी जारी है. ऐसे में व्यापारी वर्ग को यह  ज़िम्मेदारी उन्हीं पर छोड़ देनी चहिये. क्यूंकि इसके खिलाफ़ हड़ताल या दुकानें बंद करके उनका ही नुकसान हो रहा है.

प्रेस्टलोन्स (PrestLoans) जैसी NBFC कंपनी का मानना है कि व्यापारी यदि जीएसटी में रजिस्ट्रेशन करा लेंगें तो यह उनकी तरफ से लिया गया एक सकारात्मक कदम होगा. यह शुरू में भले ही थोडा कष्टदायक लगता है लेकिन दीर्घकाल में इसका सबसे अधिक फायदा व्यापारी बंधुओं को ही होगा.व्यापार का सारा विवरण रिकॉर्ड में होने के कारण सस्ती दर पर आसानी से लोन ले पाएंगे क्योंकि इन व्यापारियों के प्रति प्रेस्टलोन्स जैसी NBFC कंपनी का विश्वास भी बढ़ेगा. अगर आप जीएसटी रजिस्टर्ड हैं तो माना जायेगा कि आप सही तरीके से व्यापर कर रहे हैं. सिर्फ इतना ही नहीं जीएसटी में एक रेटिंग सिस्टम भी है और मेरा ऐसा मानना है कि जीएसटी की रेटिंग के हिसाब से ही बैंक और NBFC व्यापारियों की रेटिंग करेंगे और उन्हें उसी तरीके से लोन भी देंगे जैसे ई- कॉमर्स में भी रिव्यू और रेटिंग सिस्टम से छोटे व्यापारियों को लोन मिला है इसीलिए व्यापारी वर्ग को यह टैक्स एक अवसर की तरह लेना चाहिए व ‘गुड्स एंड सर्विस टैक्स’ (GST) में जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए.  

Read More...

छोटे व्यापारियों की समस्याएँ व समाधान

  04.July.2017

सुबह की चाय हो या शाम की चाट, घर में इस्तेमाल होने वाले बर्तन हों या गाड़ियों में लगने वाले कवर, ये सभी चीज़ें हमारी रोजाना की ज़िन्दगी का एक अटूट हिस्सा हैं और हम तक इन्हें पहुँचाने का काम करते हैं वो छोटे व्यापारी जिनका व्यवसाय हमारी ज़रूरतों पर फलता-फूलता है. ये व्यापार कोई भी हो सकता है जैसे दूध, ब्रेड, किराने की दुकान, स्टेशनरी, चमड़ा, दुपहिया व चार पहिया गाड़ियों के पार्ट्स, आर्टिफीशियल ज्यूलरी आदि. ऐसे कई व्यापार चलाने वाले छोटे-छोटे व्यापारी हमें अपने आस-पास मिल जायेंगे.   

इस तरह के सभी व्यापारी अपना व्यवसाय चलाने के लिए नक़द लेनदेन पर निर्भर हैं. शिक्षा के अभाव के चलते ये व्यापारी बैंकिंग सुविधा इस्तेमाल करने से कतराते हैं. नकदी में काम करते हुए सालाना 3 से 4 लाख कमाने वाले ये छोटे व्यापारी इनकम टैक्स के दायरे में भी नहीं आते या यूँ कह लें कि बैंक के चक्कर लगाना या लाइन में खड़ा होना इनके लिए समय की बर्बादी जैसा है. ऐसे में अपना व्यापार बढ़ाने के लिए उन्हें लोन की आवश्यकता होती है तो वह बैंक के पास नहीं जा सकते क्यूंकि बैंक उन्हें लोन देने के लिए बैंक की ट्रांज़ेक्शन सहित बिल व इनकम टैक्स रिटर्न और वैट व सेल्स टैक्स भरने जैसी जानकारियों की डिमांड करेगा जोकि कागज़ी तौर पर उनके पास मौजूद नहीं होती हैं. अच्छा व्यापार होने के बावजूद डाक्यूमेंट्स की कमी के चलते कोई भी बैंक इन्हें व्यापार में बढ़ोत्तरी के लिए लोन नहीं देता है.  

इस स्थिति में छोटे व्यापारियों की समस्या का समाधान करती है प्रेस्टलोन्स (PrestLoans) जैसी एनबीएफसी (NBFC) कंपनी. जोकि ऐसे व्यापारियों से मिलकर उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करती है. उनके पास रोज़ आने वाले ग्राहकों से लेकर उनकी सेल व बचे हुए स्टॉक का मूल्यांकन करते हुए उनके प्रॉफिट मार्जिन को समझती है. साथ ही उनकी खरीद-फ़रोख्त, लाभ-हानि को देखते हुए उनके व्यापार की बैलेंस शीट व वास्तविक नक़द व्यापार का मूल्यांकन भी करती है जो वह छोटा व्यापारी नहीं कर पा रहा.  

ऐसे में प्रेस्टलोन्स का क्रेडिट मैनेजर उधारकर्ता की पूँजी की आवश्यकता व व्यापार बढ़ाने के लिए लगने वाली रकम की ज़रूरत को समझने की कोशिश करता है. वह लोन देने से पहले उनकी वित्तीय ज़रूरतों को परखने के साथ ही कुछ और ज़रूरी जानकारियों पर भी पैनी नज़र रखता है जैसे: उधारकर्ता कितने साल से इस व्यापार में है, उसका व्यवहार व उसका सामाजिक दायरा कैसा है, वह उधार चुकाने के काबिल है या नहीं व उधार चुकाना चाहता है या नहीं आदि. क्यूंकि नए ज़माने की फिनटेक (FinTech) कंपनियां आर्थिक आंकड़ों के अलावा अन्य सामाजिक एवं व्यक्तिगत आंकड़ों पर ज्यादा ध्यान देती हैं. 

सभी जानकारियों को अच्छे से परख लेने के बाद PrestLoans इन छोटे व्यापरियों को उनका व्यापार बढ़ाने के लिए लोन देकर वित्तीय सहायता प्रदान करता है. यदि उनके पास व्यापार सम्बंधित कागज़ी सबूत न भी हो तो भी उधारकर्ता लोन के बदले अपने घर/दुकान के कागज़ या अपना स्टॉक प्रेस्टलोन्स के पास सुरक्षा के तौर पर गिरवी रख सकता है. अधिकतर मामलों में यह लोन बिना किसी गिरवी के भी होता है. लेकिन इस वित्तीय सहायता से ऐसे सभी छोटे व्यापारियों का व्यापार मुख्य धारा में आना मुमकिन हो पाता है. इस तरह उनके व्यापार में तरक्की तो होती ही है साथ ही वह नक़द व्यापार करना भी कम कर देतें हैं, जिससे समाज का विकास होता है और समाज का विकास ही देश का विकास है, जिसके लिए प्रेस्टलोन्स (PrestLoans) हमेशा ही तत्पर है. 

Read More...

Recent Post

जीएसटी (GST) को बनायें फ़ायदे का सौदा 

कल यूँ ही ऑफिस के कॉरिडोर से गुज़रते हुए तीन लोगों को जीएसटी (GST) के बारे में बात करते हुए सुना. उनमे से दो छोटे व्यापारी थे जिनका अपना जनरल स्टोर व गाड़ियों की पार्ट्स का व्यापार था व तीसरा हमारे ऑफिस का क्रेडिट मेनेजर था, जो पूरी लगन के साथ उन दोनों को जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने तथा प्रेस्टलोन्स से लोन लेने के फ़ायदे समझा रहा था. अधिक जानने पर पता चला कि उन्हें प्रेस्टलोन्स से लोन लेने के फायदे तो समझ आ रहे थे लेकिन हाल ही में सरकार द्वारा लागू किये गए ‘गुड्स एंड सर्विस टैक्स’ (GST) को लेकर उनके मन में कई सवाल व उलझनें थी जिन्हें हमारा क्रेडिट मैनजेर सुलझाने में लगा हुआ था. 

जीएसटी (GST) यानि ‘गुड्स एंड सर्विस टैक्स’, जिसे भारत सरकार द्वारा एक बहुत बड़े कर सुधार के रूप में 1 जुलाई 2017 से लागू किया जा चुका है. यह एक ऐसा एकीकृत टैक्स है जो वस्तुओं और सेवाओं दोनों पर लगता है. अर्थात अब एक्साइज ड्यूटी, सेवा कर, वैट, मनोरंजन कर आदि की जगह पर सिर्फ एक टैक्स हैं, वस्तु एवं सेवा कर (GST). इसको लेकर लोगों में जितनी दिलचस्पी है उतनी ही भ्रांतियां भी है. ख़ासकर व्यापारी वर्ग के मन में इसको लेकर कई तरह के सवाल जन्म ले रहें हैं, जैसे, जीएसटी का क्या मतलब है? इसका व्यापार पर क्या असर होगा? या फ़िर अभी तक चले आ रहे बाकी टैक्सेज से यह कितना अलग है? उनके मन में चल रहे इन्हीं सवालों की वजह से जीएसटी के प्रति व्यापारियों में रोष व्याप्त हो गया है और वह इसके खिलाफ़ विरोध पर उतर आये है.

बात करें पहले लगाये जाने वाले बाकि टैक्सेज जैसे- एक्साइज ड्यूटी, सेवा कर, वैट आदि की तो इसके बारे में भी व्यापरियों को गहरी जानकारी नहीं थी, चूंकि यह टैक्स लम्बे समय से चले रहे थे इसीलिए कहीं न कहीं इसको उन्होंने अपनी आदत में शामिल कर लिया था. यही वजह है की जीएसटी को वह स्वीकार नहीं कर पा रहें हैं, जिसके परिणाम स्वरुप नुकसान उन्हीं को उठाना पड़ रहा, इससे अच्छा यही है की सरकार द्वारा लागू किये इस टैक्स को वह सहर्षता के साथ स्वीकार करें व इसको समझने की सकारात्मक कोशिश करें. 

यहाँ समझने वाली बात यह है कि सरकार ने व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए और नए सिस्टम को अच्छे से समझने के लिए सभी व्यापारियों को पहले 2 महीने में जीएसटी रिटर्न फाइल करने से छूट दे रखी है. इसके अलावा किसी भी व्यापार को शुरू करने से पहले जहाँ व्यापारी को एक्साइज ड्यूटी, सेवा कर, वैट आदि अलग-अलग रजिस्ट्रेशन कराने पड़ते थे वही सरकार ने इससे राहत प्रदान करते हुए अब सिर्फ एक रजिस्ट्रेशन ही अनिवार्य किया है और वो है जीएसटी. साथ ही सरकार ने जीएसटी से सम्बंधित किसी भी समस्या के समाधान के लिए जगह-जगह जीएसटी सेवा केंद्र खोल रखे हैं. व्यापारी इनके कॉल सेंटर में फ़ोन करके या ख़ुद केन्द्रों पर जाकर अपने सवालों का जवाब प्राप्त कर सकते हैं. 

व्यापारी वर्ग के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि जीएसटी के तहत सरकार ने कारोबारियों की कुछ श्रेणियां बनायीं है जिनके अंतर्गत ऐसे छोटे व्यापारियों को शामिल किया गया है, जिनका सालाना टर्न ओवर या तो 20 लाख तक है या फिर 20 से 75 लाख तक है. जहां तक 20 लाख से नीचे के दुकानदारों की बात है तो बता दें कि उनके ऊपर जीएसटी टैक्स का कोईफर्क नहीं पड़ा है,पहले भी वो टैक्स नहींदेते थे और अब भी वह जीएसटी की छूट वाली श्रेणी में ही आते है. ऐसे में 20 लाख तक सालाना टर्नओवरवाले कारोबारियों पर जीएसटी का कोई असर नहीं पड़ा है.

वहीँ 20 से 75 लाख तक सालाना टर्नओवर वाले व्यापारियों को पहले सामान बेचने पर वैट और कई दूसरे टैक्स देने पड़ते थे, अब जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ये ग्राहकों से जीएसटी चार्ज कर पाएंगे और इनपुट क्रेडिट भी ले पाएंगे या सरकार की कंपोजिट स्कीम लेकर उन्हें सालानाटर्नओवर का सिर्फ 0.5 फीसदी टैक्स देना पड़ेगा, यानि 75 लाख के टर्नओवर पर सालाना 37500 रूपए टैक्स देना होगा. एक तरीके से देखें तो कोई ख़ास बदलाव नहीं हुआ है. जहाँ तक बात रही रिटर्न फ़ाइल करने की या फिर टैक्स भरने की तो पहले से ही यह काम व्यापारियों के चार्टेड अकाउंटेंट या फिर कंसलटेंट करते आ रहे थे जो कि अभी भी जारी है. ऐसे में व्यापारी वर्ग को यह  ज़िम्मेदारी उन्हीं पर छोड़ देनी चहिये. क्यूंकि इसके खिलाफ़ हड़ताल या दुकानें बंद करके उनका ही नुकसान हो रहा है.

प्रेस्टलोन्स (PrestLoans) जैसी NBFC कंपनी का मानना है कि व्यापारी यदि जीएसटी में रजिस्ट्रेशन करा लेंगें तो यह उनकी तरफ से लिया गया एक सकारात्मक कदम होगा. यह शुरू में भले ही थोडा कष्टदायक लगता है लेकिन दीर्घकाल में इसका सबसे अधिक फायदा व्यापारी बंधुओं को ही होगा.व्यापार का सारा विवरण रिकॉर्ड में होने के कारण सस्ती दर पर आसानी से लोन ले पाएंगे क्योंकि इन व्यापारियों के प्रति प्रेस्टलोन्स जैसी NBFC कंपनी का विश्वास भी बढ़ेगा. अगर आप जीएसटी रजिस्टर्ड हैं तो माना जायेगा कि आप सही तरीके से व्यापर कर रहे हैं. सिर्फ इतना ही नहीं जीएसटी में एक रेटिंग सिस्टम भी है और मेरा ऐसा मानना है कि जीएसटी की रेटिंग के हिसाब से ही बैंक और NBFC व्यापारियों की रेटिंग करेंगे और उन्हें उसी तरीके से लोन भी देंगे जैसे ई- कॉमर्स में भी रिव्यू और रेटिंग सिस्टम से छोटे व्यापारियों को लोन मिला है इसीलिए व्यापारी वर्ग को यह टैक्स एक अवसर की तरह लेना चाहिए व ‘गुड्स एंड सर्विस टैक्स’ (GST) में जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए.  

Read More...

छोटे व्यापारियों की समस्याएँ व समाधान

सुबह की चाय हो या शाम की चाट, घर में इस्तेमाल होने वाले बर्तन हों या गाड़ियों में लगने वाले कवर, ये सभी चीज़ें हमारी रोजाना की ज़िन्दगी का एक अटूट हिस्सा हैं और हम तक इन्हें पहुँचाने का काम करते हैं वो छोटे व्यापारी जिनका व्यवसाय हमारी ज़रूरतों पर फलता-फूलता है. ये व्यापार कोई भी हो सकता है जैसे दूध, ब्रेड, किराने की दुकान, स्टेशनरी, चमड़ा, दुपहिया व चार पहिया गाड़ियों के पार्ट्स, आर्टिफीशियल ज्यूलरी आदि. ऐसे कई व्यापार चलाने वाले छोटे-छोटे व्यापारी हमें अपने आस-पास मिल जायेंगे.   

इस तरह के सभी व्यापारी अपना व्यवसाय चलाने के लिए नक़द लेनदेन पर निर्भर हैं. शिक्षा के अभाव के चलते ये व्यापारी बैंकिंग सुविधा इस्तेमाल करने से कतराते हैं. नकदी में काम करते हुए सालाना 3 से 4 लाख कमाने वाले ये छोटे व्यापारी इनकम टैक्स के दायरे में भी नहीं आते या यूँ कह लें कि बैंक के चक्कर लगाना या लाइन में खड़ा होना इनके लिए समय की बर्बादी जैसा है. ऐसे में अपना व्यापार बढ़ाने के लिए उन्हें लोन की आवश्यकता होती है तो वह बैंक के पास नहीं जा सकते क्यूंकि बैंक उन्हें लोन देने के लिए बैंक की ट्रांज़ेक्शन सहित बिल व इनकम टैक्स रिटर्न और वैट व सेल्स टैक्स भरने जैसी जानकारियों की डिमांड करेगा जोकि कागज़ी तौर पर उनके पास मौजूद नहीं होती हैं. अच्छा व्यापार होने के बावजूद डाक्यूमेंट्स की कमी के चलते कोई भी बैंक इन्हें व्यापार में बढ़ोत्तरी के लिए लोन नहीं देता है.  

इस स्थिति में छोटे व्यापारियों की समस्या का समाधान करती है प्रेस्टलोन्स (PrestLoans) जैसी एनबीएफसी (NBFC) कंपनी. जोकि ऐसे व्यापारियों से मिलकर उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करती है. उनके पास रोज़ आने वाले ग्राहकों से लेकर उनकी सेल व बचे हुए स्टॉक का मूल्यांकन करते हुए उनके प्रॉफिट मार्जिन को समझती है. साथ ही उनकी खरीद-फ़रोख्त, लाभ-हानि को देखते हुए उनके व्यापार की बैलेंस शीट व वास्तविक नक़द व्यापार का मूल्यांकन भी करती है जो वह छोटा व्यापारी नहीं कर पा रहा.  

ऐसे में प्रेस्टलोन्स का क्रेडिट मैनेजर उधारकर्ता की पूँजी की आवश्यकता व व्यापार बढ़ाने के लिए लगने वाली रकम की ज़रूरत को समझने की कोशिश करता है. वह लोन देने से पहले उनकी वित्तीय ज़रूरतों को परखने के साथ ही कुछ और ज़रूरी जानकारियों पर भी पैनी नज़र रखता है जैसे: उधारकर्ता कितने साल से इस व्यापार में है, उसका व्यवहार व उसका सामाजिक दायरा कैसा है, वह उधार चुकाने के काबिल है या नहीं व उधार चुकाना चाहता है या नहीं आदि. क्यूंकि नए ज़माने की फिनटेक (FinTech) कंपनियां आर्थिक आंकड़ों के अलावा अन्य सामाजिक एवं व्यक्तिगत आंकड़ों पर ज्यादा ध्यान देती हैं. 

सभी जानकारियों को अच्छे से परख लेने के बाद PrestLoans इन छोटे व्यापरियों को उनका व्यापार बढ़ाने के लिए लोन देकर वित्तीय सहायता प्रदान करता है. यदि उनके पास व्यापार सम्बंधित कागज़ी सबूत न भी हो तो भी उधारकर्ता लोन के बदले अपने घर/दुकान के कागज़ या अपना स्टॉक प्रेस्टलोन्स के पास सुरक्षा के तौर पर गिरवी रख सकता है. अधिकतर मामलों में यह लोन बिना किसी गिरवी के भी होता है. लेकिन इस वित्तीय सहायता से ऐसे सभी छोटे व्यापारियों का व्यापार मुख्य धारा में आना मुमकिन हो पाता है. इस तरह उनके व्यापार में तरक्की तो होती ही है साथ ही वह नक़द व्यापार करना भी कम कर देतें हैं, जिससे समाज का विकास होता है और समाज का विकास ही देश का विकास है, जिसके लिए प्रेस्टलोन्स (PrestLoans) हमेशा ही तत्पर है. 

Read More...